जयपुर की गलियों में पुराना काम अब भी बोलता है
जयपुर की कई गलियों के नाम देखकर लगता है जैसे शहर ने अपनी डायरी दीवार पर लिख दी हो। पत्तर-पट्टी, मोहल्ला, बाज़ार — इन नामों में वही काम छुपा है जो कभी उस गली की पहचान था। कहीं बुनाई, कहीं मिट्टी के बर्तन, कहीं सोना-चाँदी, कहीं मसाले। आज दुकान बदल गई हो, पर नाम अब भी पुरानी रोशनी संभाले हुए हैं। म्हारे जयपुर में ये सिर्फ पता नहीं, एक याद है — किस गली में क्या बनता था, क्या बिकता था, और कौन सा हाथ रोज़ सुबह काम पर लगता था। नाम बोलते हैं, बस हम थोड़ा धीरे सुनते नहीं।
