जयपुर की कचौरी सुबह का नक्शा
गली के मोड़ पर भुनी हुई कचौरी की खुशबू जैसे पूरी कॉलोनी को एक ही सुर में जगा देती है। जयपुर में सुबह का नक्शा गूगल से कम, मोहल्ले के नुस्खे से ज़्यादा चलता है। हर इलाके का अपना “सच्चा” ठिकाना होता है—कोई कहता है राजा पार्क की कचौरी, कोई सोडाला की, कोई मुरलीपुरा के पोहे के साथ वाली। फिर बात स्वाद से निकलकर आदत पर आ जाती है। घणी बार लोग बस इसलिए वही जाते हैं क्योंकि वहाँ की चटनी उनके बचपन जैसी लगती है, और बेचने वाला उनका ऑर्डर बिना बोले समझ लेता है। म्हारे जयपुर में कचौरी सिर्फ नाश्ता नहीं, सुबह का छोटा सा रिश्ता है—थाली में गरम, और यादों में और भी गरम।
