जयपुर की लस्सी: एक प्याला, पूरी रस्म
जयपुर में लस्सी का प्याला मिलते ही बात अलग हो जाती है। पहले नज़र आती है उसकी मोटी परत, फिर चम्मच से उठती मलाई, और उसके बाद वह मीठा, ठंडा स्वाद जो धीरे-धीरे पिया जाता है। यहाँ लस्सी को जल्दी खत्म करने की चीज नहीं माना जाता; इसे थोड़ा रुककर, थोड़ा संभलकर पिया जाता है। छोटी-सी कुल्हड़ हो या बड़ा गिलास, दोनों में एक ही बात होती है: घनी लस्सी, काफी मीठी, और ऊपर से मलाई का डब्बा-सा हिसाब। म्हारे यहाँ गर्मी का जवाब भी अक्सर इसी से मिल जाता है। और सच्ची, एक अच्छी जयपुर लस्सी का सबसे बड़ा राज उसका आख़िरी चम्मच होता है।
