जयपुर की लू से बचने का असली कोड
जयपुर की लू आते ही सड़कों का रंग बदल जाता है। सुबह ठीक-ठाक लगने वाली हवा दोपहर तक ऐसी हो जाती है जैसे किसी ने ओवन का दरवाज़ा खोल दिया हो। घणी धूप, गरम पत्थर, और आँखों के सामने हिलती हुई हवा — बस यही गर्मी का दृश्य है। यहाँ बचने का कोड सीधा है: सुबह का काम जल्दी, दोपहर में छाया, और पानी हमेशा साथ। घरों में मटका आज भी काम आता है, और पुराने जयपुर में लोग छत की दीवार के पास बैठकर ठंडी हवा ढूँढ़ते हैं। म्हारो एक ही नुस्खा: लू से लड़ना नहीं, उसके हिसाब से चलना। शाम को जब हवा थोड़ी नरम होती है, तभी गलियों में जान आती है। जयपुर की गर्मी इसी जुगाड़ से निकलती है — धीरे, पर पक्का।
