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जयपुर की महफिल में सियासत और धर्म की बात

Jaipur ki mehfil mein siyaasat aur dharm ki baat

जयपुर के एक अवार्ड प्रोग्राम में बात सीधी नहीं, पर तेज थी। सीनियर नेता ने कहा कि धर्म को सियासत का औज़ार बनाना संविधान की रूह के खिलाफ है, और इस तरह की सोच पर आज के वक़्त में सख्त कदम उठ सकते थे। उनकी बात का मतलब यही था कि जब धर्म को वोट के हिसाब से तौलने लगते हैं, तो असली मुद्दा पीछे छूट जाता है। उन्होंने डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूशन्स पर दबाव का ज़िक्र भी किया, और सेंट्रल एजेंसिज़ के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई। जयपुर की इस महफिल में सबसे ज़्यादा ध्यान उस हिस्से पर गया जहाँ उन्होंने युवाओं से कहा कि पॉलिटिक्स को दूर से देखने के बजाय उसमें आना चाहिए। बात का सार सिंपल था: अगर पब्लिक इशूज़ पर आवाज़ कम होगी, तो सिस्टम और ढीला पड़ेगा। घणी सीधी बात, पर असर वाली।

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