जयपुर की पहचान को संभालने का संकल्प
जयपुर की पहचान सिर्फ इमारतों में नहीं, उसकी गलियों, जालियों और खुले आँगनों में भी बसी है। इसी बात को सामने रखते हुए नवनिर्वाचित महापौर ने शहर के ऐतिहासिक स्वरूप को सँभालने को प्राथमिकता दी है। मतलब, विकास हो, पर ऐसा न हो कि पुरानी रूह कहीं दब सी जाए। शहर में सफाई, यातायात और बुनियादी सुविधा जैसे मुद्दे भी साथ-साथ चल रहे हैं, और यही वजह है कि लोग इस संकल्प को सिर्फ नारा नहीं, एक व्यावहारिक परीक्षा की तरह देख रहे हैं। स्थानीय एहसास भी यही है कि जयपुर को आधुनिक बनाना है, पर उसकी पहचान को बिना छेड़े। घणी सच्ची बात है — नई योजना का मतलब पुरानी मिट्टी से रिश्ता तोड़ना नहीं होता। अब देखने वाली बात यह है कि ज़मीन पर यह सोच कितनी ढंग से उतरती है।
