जयपुर की सड़कों पर हर दिन का जोखिम
जयपुर में सड़क का सफर अब सिर्फ दूरी का हिसाब नहीं, जोखिम का भी हिसाब बन गया है। रोज़ लगभग 9 हादसे हो रहे हैं और उनमें 3 लोग जान गँवा रहे हैं। यह आँकड़ा सुनने में ठंडा लग सकता है, पर इसके पीछे घरों की ख़ामोशी, अस्पताल की भागदौड़ और घर लौटने का इंतज़ार टूटने की कहानी छुपी है। शहर की तेज़ी, यातायात का दबाव, हेलमेट और सीट बेल्ट को हल्का लेना, और चौराहे पर ज़रा सी जल्दी — ये सब मिलकर सड़कों को और सख़्त बना देते हैं। एक स्थानीय असर यह भी है कि लोग अब सफर पर निकलते समय बस पहुँचने की दुआ करते हैं। सच्ची बात यह है कि सड़क सुरक्षा सिर्फ़ नियम नहीं, रोज़ की आदत है। और अब सवाल यही है: जयपुर इस आदत को बदलेगा कैसे?
