जयपुर में जीरो एफआईआर पर धरना, पुलिस का अलग पक्ष
पुलिस आयुक्तालय के बाहर आज मामला बिल्कुल संख्या-आधारित था। जीरो एफआईआर की माँग पर कांग्रेस के लोग धरने पर बैठे रहे, और भीड़ का दबाव तब बढ़ा जब कुछ युवा कार्यकर्ता बैरिकेड और दीवार की तरफ चढ़ गए। पुलिस ने उन्हें वहाँ से हटाने की कोशिश की, ताकि घेराबंदी और न बढ़े। यहाँ मोड़ यह रहा कि पुलिस का कहना था — जिस मामले को लेकर जीरो एफआईआर माँगी जा रही है, उस पर दिल्ली में पहले से शिकायत दर्ज है। यानी बात सिर्फ सड़क पर शोर की नहीं, कागज़ी प्रक्रिया की भी है। जयपुर में ऐसे मौकों पर अक्सर यही होता है: माँग एक होती है, और व्यवस्था का जवाब किसी दूसरी फ़ाइल से आता है। आज भी दृश्य ने वही दिखाया — राजनीति, पुलिस और कागज़ी कार्रवाई, तीनों एक ही फ्रेम में।
