जयपुर रैली के बाद एक थप्पड़, फिर दिल्ली मार्च
जयपुर के रैली-धरने में जो हुआ, उसने एक बार फिर याद दिला दिया कि बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मसले कितने जल्दी गुस्से में बदल जाते हैं। प्रोटेस्ट के दौरान एक थप्पड़ पड़ने के बाद बात सिर्फ भीड़ की नहीं रही, बात उस बेचैनी की भी हो गई जो रोज के जॉब-संकट से बनती है। म्हारे शहर में ऐसे मौकों पर लोग सीधा बोल देते हैं — जब काम कम हो, तो नाराज़गी भी तेज हो जाती है। इस घटना के बाद 20 जून को दिल्ली मार्च की बात आई है, जहां मांग एजुकेशन मिनिस्टर के इस्तीफ़ा की है। यानी अब प्रोटेस्ट का मूड लोकल स्टेज से निकल कर सीधा नेशनल प्रेशर की तरफ जा रहा है। जयपुर का सीन यहीं रुकता नहीं; यहां हर रैली एक नई बात छेड़ देती है। और सच्ची बात, जब यूथ का सवाल बीच में हो, तो ऐसे झटके सिर्फ एक दिन की खबर नहीं रहते.
