जयपुर के स्कूलों पर सुरक्षा का सवाल फिर गरम
स्कूल के बाहर खड़े लोगों के लिए यह सिर्फ़ एक निरीक्षण नहीं था, बल्कि एक सीधा सा सवाल था: बच्चों की जगह इतनी घनी और बंद क्यों लग रही है? हमले के कुछ दिन बाद, CJP ने जयपुर के कई स्कूलों का जायजा लिया और उन जगहों पर ध्यान दिलाया जहाँ सुरक्षा और खुली जगह दोनों पर बात उठ रही थी। पिंजरे जैसी घेराबंदी और कमज़ोर तैयारी ने माहौल को और भारी बना दिया। CJP ने साफ़ कहा कि अगर 7 दिन के भीतर मसलों का हल नहीं हुआ, तो स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर सार्वजनिक आंदोलन शुरू किया जा सकता है। यानी मामला सिर्फ़ कागज़ों तक सिमटने वाला नहीं, अब गली और मोहल्ले की आवाज़ भी जुड़ रही है। स्कूल बच्चों की जगह है, और वही सबसे पहले खुली, साफ़ और भरोसेमंद होनी चाहिए — बस इतना ही इस पूरे मामले का सीधा सा मतलब है।
