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जयपुर बोलेJaipur Bole

झरोखे वाली सुबह का जयपुर

Jharokha wali subah ka Jaipur

पुराने जयपुर के कई घरों में झरोखा सिर्फ सजावट नहीं, रोज़ का पहला हाथ मिलाने का तरीका है। सुबह दरवाज़ा खोलने से पहले लोग खिड़की जैसे उस नक्काशीदार खुले हिस्से से बाहर देखते हैं: कौन सामने से गुज़र रहा है, कौन सब्ज़ीवाला आया, और किस घर में आज जल्दी चाय बनी। यह छोटा सा नज़ारा घर को सड़क से जोड़ देता है, बिना पूरी बात खोले। घणी बार इसी झरोखे से “पधारो” की हल्की सी आवाज़ आती है, और सामने वाला बस सिर हिला देता है। जयपुर की इस आदत में दीवार के भीतर रहकर भी मोहल्ले से जुड़ा रहना आता है। म्हारे यहाँ सुबह का पहला दृश्य यही होता है: पहले नज़र, फिर बात, फिर दिन।