जोधपुर की प्यास पर फिर सवाल उठा
जोधपुर में पानी का हिसाब फिर चर्चा में आ गया है। शहर की गर्मी और लंबी प्यास के बीच जब आपूर्ति 500 एमएलडी की ज़रूरत से नीचे रह जाए, तो बात सिर्फ संख्या की नहीं रहती — रोज़मर्रा की ज़िंदगी की हो जाती है। गली, मोहल्ले और बस्तियों में लोग पहले ही टंकी और आपूर्ति के समय के हिसाब से दिन चलाते हैं। इसी बीच पश्चिमी राजस्थान की पानी की तस्वीर भी धुंधली दिखती है। जहाँ एक तरफ शहर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ जल-लाइन और वितरण पर दबाव बढ़ता जा रहा है। लोग बस इतना ही कह रहे हैं कि व्यवस्था में पानी आना और उसका सही तरह से पहुँच जाना, दोनों अलग बातें हैं। यह अंतर जब तक कम नहीं होता, जोधपुर की प्यास का सवाल वैसे का वैसा ही खड़ा रहेगा।
