जौहरी बाजार: चूड़ियाँ, बारात और दुल्हन वाला ड्रामा
जौहरी बाजार में पधारो तो पहले तंग गलियाँ, फिर चूड़ियों की सजी हुई दीवारें, और फिर काँच की खनक—बस यही तीन चीजें जयपुर को महसूस करवा देती हैं। दुकानों के सामने अलग-अलग रंग की चूड़ियाँ ऐसे सजी होती हैं जैसे किसी ने रंगों की थाली पलट दी हो। दुल्हन की खरीदारी यहाँ सीधा काम नहीं, पूरा दृश्य होता है: माँ का नापना, सहेलियों का हँसना, और दुकानदार का घणी साफ बोलना, “यह सेट दुल्हन पर जमेगा।” इस बाजार में हर पसंद एक छोटी-सी निर्णय बन जाती है। और जब कोई दुल्हन एक ही रंग पर अटक जाए, तो पूरा मोड़ उसी रंग के साथ चलने लगता है।
