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जयपुर बोलेJaipur Bole

जोहरी बाजार की खिड़कियों में चमक का हिसाब

Johari Bazaar ki khidkiyon mein chamak ka hisaab

जोहरी बाजार की गलियों में चलोगे, तो सबसे पहले आवाज़ नहीं, चमक मिलती है। शीशे के पीछे कुंदन-पोलकी के सेट ऐसे सजते हैं जैसे किसी ने रोशनी को ही गहना बना दिया हो। यहाँ खरीदारी का हिसाब आकार से नहीं, नज़र से होता है। म्हारे जयपुर में लोग कहते हैं, जो चीज़ दिल को एक पल में पकड़ ले, वही असली है। इस बाजार की खिड़कियाँ बस प्रदर्शन नहीं, एक पुरानी आदत हैं—देखना, रोकना, फिर सोचना। कोई अंगूठी, कोई हार, कोई झुमका; सब अपनी जगह पर चमक रहे होते हैं। और वह लड़की दो बार वापस मुड़ी इसलिए देखती रही, क्योंकि उसकी माँ ने वही हार पसंद कर लिया था। बस, फिर बात तय। जोहरी बाजार में कभी-कभी फैसला पहले दिल करता है, बाद में जेब।