जोहरी बाजार की कुंदन-मीना विरासत
जोहरी बाजार में सुबह की पहली रोशनी गिरते ही दुकानों के शीशे चमक उठते हैं। यहाँ परिवार के जौहरियों की पीढ़ी ने कुंदन-मीना को सिर्फ़ गहना नहीं, जयपुर की पहचान बना दिया। एक तरफ़ सोना, दूसरी तरफ़ रंग-बिरंगे मीनाकारी काम; बस एक छोटी-सी मेहनत से हार में जान आ जाती है। भाइसा, इस काम का सब्र बाज़ार ही सिखाता है। एक गहना बनाने में कहीं घिसाई, कहीं जड़ाई, कहीं मीना की पतली परत। पुराने उस्ताद के हाथ और घर की दुकान का भरोसा—यही जोहरी की जान है। अब भी कई घराने अपनी निशानी वाले नमूने संभाले हुए हैं, ताकि नया ग्राहक भी कहे: सच्ची, यह तो जयपुर का काम है।
