जौहरी बाजार की नथ, घर की निशानी
जौहरी बाजार की नथ सिर्फ सोना नहीं, जयपुर की पहचान भी है। पहले यह छोटी, सीधी सी नथ बाजार से ली जाती थी, फिर घर की औरतों के हाथ से पीढ़ी दर पीढ़ी संभलती रही। शादी, तीज, गणगौर या कोई खास दिन—हर बार वही नथ, बस नई कहानी के साथ। जयपुर के काफी घरों में आज भी नथ को बेचने की चीज नहीं, याद की चीज माना जाता है। म्हारे यहाँ कहा भी जाता है: “ज़ेवर पहना जाता है, पर निशानी संभाली जाती है।” इसी लिए कभी माँ अपनी नथ बेटी को दे देती है, कभी सास बहू को। जौहरी बाजार की चमक में इस नथ का असली रंग उसके सफर से आता है।
