जौहरी बाजार की शीशा मेहनत
जौहरी बाजार की दुकानों में शीशा का काम बस सजावट नहीं, एक पुरानी आदत है। छोटे कांच के टुकड़े, सुनहरी या रंग-बिरंगी झलक, और कपड़े पर ऐसी सिलाई कि रोशनी भी ठहर जाए। जयपुर में गहने, कपड़े और बंधानी के साथ यह चमक पहले से जुड़ी रही है। म्हारे यहां कारीगर एक नज़र में समझ जाता है कि कौन सा टुकड़ा किस जगह बैठेगा, और कौन सा किनारा ज़रा से दबाव से टूट सकता है। इसी लिए यह काम “simple” दिखकर भी मुश्किल लगता है। बाज़ार की छोटी सी जगह में जो चमक मिलती है, वह मशीन से नहीं, आँख और सब्र से बनती है। सच्ची बात, जयपुर की खूबसूरती का आधा राज़ इसी नज़ाकत में है।
