जुलाई में एयरपोर्ट्स की भीड़ थोड़ी हल्की पड़ी
जुलाई का एयरपोर्ट दृश्य थोड़ा उलटा-पुलटा रहा। देश भर में पैसेंजर ट्रैफिक 4.7% नीचे आया, यानी जो टर्मिनल कभी भीड़ से भरे रहते थे, वहाँ इस बार थोड़ी साँस मिली। यह गिरावट सिर्फ एक-दो शहरों की बात नहीं, कुल मिलाकर patronage में कमी का संकेत है। लेकिन मोड़ यहाँ है: बड़े एयरपोर्ट्स में दिल्ली ने घरेलू वृद्धि सकारात्मक दिखाई। मतलब एक जगह ट्रैफिक सँभला, जबकि बाकी नेटवर्क में रफ़्तार धीमी पड़ी। यात्रा का मन, टिकट के दाम और मौसम का असर ऐसे आँकड़ों में सीधे दिखता है — कभी भीड़, कभी खाली सीटें। एयरपोर्ट की दुनिया में एक छोटा-सा आंकड़ा भी पूरी तस्वीर बदल देता है, और इस बार वह तस्वीर थोड़ी गंभीर निकली। आने वाले महीनों में देखना होगा कि यह हल्की खामोशी अस्थायी है या नया रुझान।
