करणी माता: देश की योद्धा-संत
देश्नोक में करणी माता का मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, मारवाड़ की याद भी है। 14वीं से 16वीं सदी के बीच जीवन जीने वाली करणी माता को लोग भगवती, मेहाई और जगदंबा भी कहते थे। उन्हें योद्धा-संत माना गया, और राव जोधा तथा राव बीका ने अपने राज्य बसाने में उनकी कृपा को याद रखा। बीकानेर और जोधपुर के महलों से लेकर किले तक, उनका नाम साथ चलता रहा। देश्नोक का मंदिर उनकी सबसे पहचानी पहचान बना, जहाँ मंदिर और उसके आसपास का ओरान पवित्र माना जाता है। म्हारे मारवाड़ में ऐसे संतों की बात आज भी सच्ची लगती है — जो शक्ति को सेवा से जोड़ दें।
