किशनपोल की लकड़ी और हाथ का काम
किशनपोल बाज़ार की गली में सुबह से ही लकड़ी की धूल, वार्निश की हल्की गंध और मज़दूरों की आवाज़ घुल जाती है। यह जयपुर का वह हिस्सा है जहाँ थोक लकड़ी, फर्नीचर और हस्तशिल्प का काम लंबी साँस लेता है। दुकान के बाहर कटाई, अंदर घिसाई, और कोने में रंग-बिराई — सब एक ही छत के नीचे। यहीं एक सौदा 12 हज़ार रुपये से शुरू हुआ और घणी बात-चीत के बाद 8 हज़ार पर तय हुआ। दुकानदार बोला, “म्हारे यहाँ माल भी सही, और भाव भी सीधा।” इसी अंदाज़ में किशनपोल का बाज़ार चलता है: थोड़ा हाथ, थोड़ा हिसाब, और बहुत सा धैर्य। पधारो जयपुर की इस गली में, यहाँ हर टुकड़ा सिर्फ लकड़ी नहीं, काम का इमान भी है।
