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बाज़ार के किस्सेBazaar Ke Kisse

किशनपोल की लकड़ी और कला का बाजार

Kishanpole ki lakdi aur kala ka bazaar

किशनपोल बाजार की गलियाँ सुबह से ही लकड़ी की महक से भर जाती हैं। इधर थोक में पल्ला, चौखट, फर्नीचर का सामान और हस्तशिल्प के टुकड़े एक साथ मिलते हैं। दुकानदार बोलते हैं, यह लेन सिर्फ बेचने की जगह नहीं, काम समझने की जगह है। हाथ से कटी लकड़ी, नक्काशी और रंगीन फिनिश देखकर लगता है जैसे हर दुकान अपनी कहानी सुना रही हो। इसी बाजार में एक पुरानी परिवार की दुकान ने इस हफ्ते 42 साल का पुराना करार खत्म कर दिया। वजह थी बदलते ऑर्डर और महँगे कच्चे माल की लागत। जो लोग रोज़ यहाँ आते हैं, उनके लिए यह सिर्फ एक व्यापार की बात नहीं; एक पुरानी आदत का टूटना है। किशनपोल का यही तो रंग है, सच्ची—सामान से ज़्यादा रिश्तों का बाजार।

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