कोटा मातृ मृत्यु मामले पर हिसाब का सवाल फिर उठा
कोटा में मातृ मृत्यु के मामले ने एक और मोड़ ले लिया है। वरिष्ठ डॉक्टरों को निलंबन के बाद क्लीन चिट मिलने की बात आई, और उसके साथ ही जवाबदेही पर नया सवाल खड़ा हो गया। मसला सिर्फ एक आदेश का नहीं है, बल्कि पूरी चिकित्सकीय निगरानी शृंखला का है — प्रसव के समय की समीक्षा, वार्ड-स्तर की निगरानी, और रिपोर्ट का अनुवर्ती। जब एक तरफ क्लीन चिट मिलती है और दूसरी तरफ परिवारों को जवाब अब भी अधूरा लगता है, तब व्यवस्था की कमी ज्यादा साफ दिखने लगती है। यही वजह है कि कोटा का यह मामला सिर्फ एक प्रशासनिक अपडेट नहीं, बल्कि आंकड़ों और जवाबदेही की परीक्षा बन गया है। घणी सच्ची बात यह है: आंकड़े अगर ठीक से समझे न जाएँ, तो दर्द भी फाइल में गुम हो जाता है।
