कोटा में किडनी जटिलता से दो और गर्भवती महिलाओं की मौत
कोटा में सिजेरियन प्रसव के बाद किडनी से जुड़ी परेशानियों ने फिर से सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है। दो गर्भवती महिलाओं की मौत के बाद अस्पताल के गलियारे में जो खामोशी थी, वह बस एक चिकित्सकीय मामला नहीं लग रही थी — वह उस भरोसे की टूटती हुई आवाज़ थी जो परिवार इलाज के समय अस्पताल पर रखता है। ऐसा मामला तब और भारी हो जाता है जब प्रसव के बाद स्वास्थ्य-लाभ की उम्मीद होती है, पर शरीर उलटा संकेत देने लगता है। कोटा के इस अस्पताल में जो हुआ, उसने दिखाया कि किडनी की निगरानी और प्रसवोत्तर देखभाल कितनी ज़रूरी होती है। लोगों के बीच एक ही बात घूम रही थी: अगर नई माँ का ध्यान समय पर न रखा जाए, तो छोटी लगने वाली दिक्कत भी कितनी बड़ी हो सकती है। इसलिए अब सबकी नज़र इस बात पर है कि आगे निगरानी और उपचार की व्यवस्था कैसे और सख्त होगी।
