कोटा में स्टूडेंट्स की सुनवाई, नीट पर फोकस
कोटा का दशहरा ग्राउंड आज स्टूडेंट्स की बात का मैदान बन गया। छात्रों की गूंज प्रोग्राम में स्टूडेंट्स ने एग्ज़ाम प्रेशर, कोचिंग की दौड़, और फ्यूचर की टेंशन जैसे मुद्दे सामने रखे। माहौल रैली जैसा कम, संवाद जैसा ज़्यादा था — जैसे शहर खुद कह रहा हो, पढ़ाई सिर्फ मार्क्स का खेल नहीं होता। राहुल गांधी ने इसी बात पर ज़ोर दिया कि यह पॉलिटिकल शो नहीं, बल्कि स्टूडेंट्स की परेशानियों पर सीधी बातचीत है। कोटा, जो कोचिंग और कॉम्पिटिशन के लिए पहचाना जाता है, वहाँ ऐसी मुलाकात का मतलब भी अलग हो जाता है। सबसे इंटरेस्टिंग थी वह लाइन जहाँ उन्होंने इस पूरे मुद्दे को आज से शुरू हुई लड़ाई जैसा बताया — मतलब अब फोकस सिर्फ सुनने पर नहीं, जवाब और सुधार पर भी होगा। म्हारे राजस्थान में ऐसी बात सीधी दिल तक लगती है।
