लोक अदालत ने 23.36 लाख का फैसला सुनाया
भरतपुर की एक महिला के मामले ने एक बार फिर याद दिला दिया कि अस्पताल का कागज़ और सही निदान, दोनों का अपना महत्व होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें कैंसर समझ कर कीमोथैरेपी दी गई, लेकिन बाद में पता चला कि असली समस्या कुछ और थी। इसी गलती के बाद मामला स्थायी लोक अदालत तक पहुँचा। अदालत ने 23,36,774 रुपये मुआवज़े का आदेश दिया। यह संख्या सिर्फ रकम नहीं, बल्कि उस तनाव का हिसाब भी लगती है जो गलत इलाज से जुड़ा होता है। ऐसे मामलों में सिर्फ पैसा नहीं, भरोसा भी हिलता है — और फिर लोग सोचते रह जाते हैं कि जाँच, परीक्षण और दूसरी राय कितनी ज़रूरी हैं। सच्ची बात यह है: स्वास्थ्य-व्यवस्था में एक छोटी सी चूक भी लंबी छाप छोड़ देती है।
