मणिहारों का रास्ता: हाथ की चूड़ियों का रंग
मणिहारों का रास्ता की सुबह में पहले खनक सुनाई देती है, फिर लकड़ी के फ्रेम पर चूड़ियों की हल्की टक्कर। यहाँ फैमिली-रन काउंटरों पर लैक, ग्लास और मिरर्ड सेट्स हाथ से पिरोए जाते हैं; एक तरफ नई दुल्हन के लिए गहरे रंग, दूसरी तरफ तीज के लिए चंचल हरा और लाल। जयपुर की बाजार वाली आदत यहीं दिखती है — देखना, चखना, फिर मोल-जोल। म्हारे एक कारीगर बोला, “सेट पूरा ले जाओ तो रेट और नरम हो जाता है।” इस लेन की असली जान वही है: छोटी वर्कशॉप्स, बड़े ऑर्डर्स, और वो कस्टमर्स जो एक-आध चूड़ी नहीं, पूरा मूड खरीदने आते हैं।
