एम.आई. रोड की कचौरी का सुबह वाला रिवाज
एम.आई. रोड की सुबह अलग ही चलती है। दुकान खुलती है, तवा गरम होता है, और घी की खुशबू सीधे सड़क पर आ जाती है। यहाँ कचौरी को थाली पर बिठा कर आराम से खाने का मन कम ही दिखता है। लोग खड़े रहते हैं, एक हाथ में कचौरी, दूसरे में रुमाल, और तीखी-मीठी चटनी का संतुलन बनाकर चलते हैं। यह सिर्फ नाश्ता नहीं, शहर के बीच की आदत है। दफ़्तर जाने वाले, दुकान वाले, और जल्दी में निकले लोग — सबका एक ही नियम: गरम कचौरी, जल्दी खाओ। एम.आई. रोड की कचौरी में जो घी का रंग और खट्टा-मीठा स्वाद है, वही जयपुर की सुबह का असली मिज़ाज है। सच्ची, इससे ज़्यादा शाही एहसास शायद किसी कुर्सी पर बैठकर भी न आए।
