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बाज़ार के किस्सेBazaar Ke Kisse

मोती डूंगरी की मिठाई लाइन में सुबह का जोश

Moti Dungri ki mithai lane mein subah ka josh

मोती डूंगरी के आसपास की मिठाई लाइन में त्योहार से पहले ही सुबह का रंग बदल जाता है। घेवर की गोल-गोल परत, मावा कचौरी की गरम महक, और पिस्ता-बादाम लगे डिब्बे — सब एक साथ धड़कने लगते हैं। दुकानदार भाईसाब कहते हैं, इस वक्त परिवार के आदेश ही असली जान होते हैं; कोई 10 डिब्बे लेता है, कोई 50। एक कोने में छोटा-सा बालक उंगली से घेवर देख रहा था, और साथ खड़ी दादी बोली, “इस बार मोटा वाला लेना, पिछली बार पतला था।” बस यही बाज़ार है — मनपसंद मीठा, थोड़ी नाक-भौं, और फिर खुशी। घणी भीड़ में भी जयपुर की यह मिठाई लाइन अपनी पहचान नहीं छोड़ती।