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बाज़ार के किस्सेBazaar Ke Kisse

मोती डूंगरी रोड पर सोने सी पायल की ठोकर

Moti Dungri Road par sone si payal ki thokar

मोती डूंगरी रोड पर सुबह धूप पड़ते ही चाँदी की चमक अलग ही रंग पकड़ लेती है। छोटी दुकानों में कारीगर नरम आवाज़ में बात-बात करते हुए पायल, बिछिया और टो-रिंग्स को हथौड़ी से आकार देते हैं। मशीन का काम यहाँ है, पर पुराने जयपुर का हाथ अब भी बाज़ार की जान है। एक कारीगर ने बताया कि कल एक जोड़ी पायल को पूरा करने में 12 घंटे लगे, क्योंकि नक़्श बिल्कुल पुराने जयपुर शैली में चाहिए था। इसी लिए लोग मोती डूंगरी रोड तक आते हैं — क्योंकि यहाँ सामान नहीं, साँस ली हुई मेहनत मिलती है। घणी मेहनत, थोड़ा सा धैर्य, और चाँदी में बसा हुआ घराना — बस यही इस गली की पहचान है।