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नीट रिटेस्ट का प्रेशर, एस्पिरेंट्स का दिमाग हेवी

NEET retest ka pressure, aspirants ka dimaag heavy

नीट को लेकर जो रिटेस्ट की चर्चा चली, उसने एस्पिरेंट्स के रूटीन को उलट-पुलट कर दिया। एक तरफ सिलेबस खत्म करने की दौड़, दूसरी तरफ अनसर्टेनिटी की थकान — इसी बीच बच्चे, पेरेंट्स और कोचिंग रूम्स सब एक ही टेंशन में बंध गए हैं। जयपुर और आस-पास के स्टूडेंट्स के लिए ये सिर्फ एग्जाम का मामला नहीं, एक पूरा घर का मूड बन गया है。 लोग कह रहे हैं, अब रिवीजन प्लान बनाना भी मुश्किल हो गया है क्योंकि कल क्या होगा, ये क्लियर नहीं। कहीं मॉक टेस्ट का प्रेशर है, कहीं स्लीप का सीन बिगड़ रहा है। स्कूल के बाद सीधा कोचिंग, फिर घर आके नोट्स — और फिर वही सवाल: रिटेस्ट होगा या नहीं? इस अनसर्टेनिटी ने मेहनत के साथ-साथ हिम्मत को भी टेस्ट पर रख दिया है。 सच्ची बात ये है कि एग्जाम की तैयारी सिर्फ मार्क्स का गेम नहीं होती, दिमाग का बैलेंस भी होता है। और जब डिसीजन लटकता रहे, तो सबसे पहले वही बैलेंस हिलता है।