न्यू सांगानेर रोड पर बुलडोजर का साया
न्यू सांगानेर रोड के किनारे जो बस्ती और बाज़ार सालों से एक-दूसरे के साथ चले आ रहे थे, उन पर अब हिस्सेदारी का नहीं, हिफाज़त का हिसाब चल रहा है। परिवार सुबह से अपना सामान समेट रहे हैं, और दुकानदार बंद लिफाफे, गत्ते और पुराने कागज़ निकालकर देख रहे हैं कि क्या बच सकता है। यह वही इलाका है जहाँ 40 से 50 साल पुराने मकान और व्यावसायिक ठिकाने एक ही साँस में बसे थे। अब Supreme Court से स्टे न मिलने के बाद JDA की तोड़फोड़ कार्रवाई की गिनती करीब आ गई है। एक तरफ त्योहारों की खरीदारी, दूसरी तरफ टूटे हुए दरवाज़े की चिंता—न्यू सांगानेर रोड पर यही सबसे तेज़ आवाज़ है। असल दर्द सिर्फ इमारत का नहीं, उस याद का है जो इन दीवारों में रहती थी।
