पंचायत चुनाव के लिए भाजपा का नया जोर
शहरी निकाय चुनावों की सफलता को अब पंचायत चुनाव के लिए एक मॉडल की तरह देखा जा रहा है। राजस्थान में सरकारी और संगठनात्मक माहौल दोनों में यह बात घूम रही है कि जमीनी काम, बूथ पर पकड़ और स्थानीय मुद्दों पर सीधा संपर्क ही असली खेल बदलता है। मुख्यमंत्री की बात का मतलब भी यही निकला — कागज पर रणनीति से ज्यादा, मैदान में मौजूदगी चाहिए। जयपुर से लेकर छोटे कस्बों तक, कार्यकर्ताओं को अब वही दैनिक लय पकड़नी होगी जो शहरी वार्ड मुकाबलों में काम आई थी। एक पार्टी कार्यकर्ता के अंदाज में, पहले सुनो, फिर समझो, और फिर गांव की धड़कन के हिसाब से चलना पड़ेगा। पंचायत का मैदान अलग होता है; यहां चेहरे से ज्यादा काम और भरोसा बोलता है। इसी लिए सबकी नजर अब उस अगले स्तर की योजना पर है जो नतीजे का रुख बदल सकती है।
