पंचोटा में आख़री सलाम, गाँव चुप सा हो गया
पंचोटा, डीडवाना-कुचामन के इस गाँव में मंडे शाम को वह मंजर था जो लोग लंबे टाइम तक याद रखेंगे। आईएएफ के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट क्रैश में जान गंवाने वाले अग्निवीर वायु का अंतिम संस्कार यहीं हुआ। घर के लोग, पड़ोसी और गाँव के कई लोग चुप-चाप खड़े रहे, जैसे हर किसी के पास कहने को शब्द कम पड़ गए हों。 सबसे भारी पल वह था जब छोटे भाई ने चिता को आग दी। इससे पहले अंतिम यात्रा गाँव के रास्ते से निकली, और हर मोड़ पर लोग बस हाथ जोड़कर खड़े दिखाई दिए। पब्लिक रिप्रेज़ेंटेटिव्स भी मौजूद रहे, पर उस शाम का असली रंग कोई भाषण नहीं, बल्कि गाँव की वह सन्नाटा भारी एकजुटता थी。 ऐसे मौके पर पंचोटा का सीन याद दिलाता है कि फौज की खबर सिर्फ हेडलाइन नहीं होती। उसके पीछे घर का दरवाज़ा, माँ-बाप की आँख और भाई का कंधा होता है। गाँव ने एक अपने को अलविदा कहा, और उस अलविदा में इज़्ज़त भी थी, दर्द भी। बस इतना ही।
