पन्ना मीणा का कुंड: जयपुर का नीला विराम
आमेर के पास पन्ना मीणा का कुंड पहुँचते ही सबसे पहले ठंडक लगती है। सफेद चूने से पुती सीढ़ियाँ, नीली टाइलों की झलक, और बीच का शांत पानी—सब मिलकर ऐसी ज्यामिति बनाते हैं जो आँखों को भी आराम दे। धूप तेज हो तब भी यहाँ हवा धीमी चलती है, और पत्थर से एक सूखी-सी ठंडक उठती रहती है। यह बावड़ी सिर्फ देखने की चीज़ नहीं, पुराने जयपुर की समझ भी है। पानी सँभालने के लिए नीचे उतरते रास्ते, छाया के कोने, और बैठने की जगह—सब सोच-समझकर बनी थी। घणी सुथरी बात, यहाँ खड़े होकर लगता है शहर ने एक पल के लिए साँस रोकी हुई है। तस्वीर ले लो, पर थोड़ी देर रुक भी जाओ।
