पन्ना मीना का कुंड: सुबह की ज्यामिति
सुबह जयपुर की हवा में जब धूप नरम होती है, पन्ना मीना का कुंड और भी खास लगता है। इस सीढ़ीदार कुएँ की ज़िग-ज़ैग सीढ़ियाँ ऊपर से नीचे तक एक सही पैटर्न बनाती हैं, जैसे किसी ने सोच-समझकर हर कोना सेट किया हो। पास खड़े हो तो पत्थर की ठंडक महसूस होती है, और नीचे उतरते ही रोशनी का खेल अलग नज़र आता है। यहाँ लोग बस देखने नहीं, रुकने भी आते हैं। घणी शांति में पानी के सूखे से आँगन और माथे को छूती धूप मिलकर एक अलग जयपुर बना देते हैं। वैसे 13 मंज़िलों वाली यह बनावट ही सबसे पहले आँख खींच लेती है। पधारो, और एक पल को शहर की रफ़्तार भूल जाओ।
