पन्ना मीना का कुंड: सुबह की ठंडक
सुबह का वक्त पन्ना मीना का कुंड को और भी खास बना देता है। आमेर के पास यह बावड़ी अपनी ज्यामितीय सीढ़ियों के लिए मशहूर है—एक तरफ़ से उतरोगे तो दूसरी तरफ़ का पैटर्न भी साफ़ दिखने लगता है, बिल्कुल शतरंज की बिसात जैसी सजावट। हवा नीचे से उठती है और गर्मियों में भी ठंडक का एहसास देती है। सीढ़ियों पर हल्की आहट गूँज बन जाती है, जैसे कुंड खुद बात कर रहा हो। पधारो, बस किनारे पर थोड़ी देर खड़े रहो: सूरज की पहली रोशनी पत्थर की सीढ़ियों पर टिकती है, फिर धीरे-धीरे सारी दीवार चमक उठती है। घणी सुकून वाली जगह है, म्हारे जयपुर की एक ऐसी डायरी एंट्री जहाँ तस्वीर से ज़्यादा याद रह जाती है।
