पैरोल खत्म, जोधपुर जेल के दरवाज़े पर नया हिसाब
जोधपुर में बुधवार को जो हुआ, वह सीधा-सा गणित वाला मामला था। पैरोल की अवधि खत्म होते ही जोधपुर सेंट्रल जेल में वापस हाजिरी देनी थी, और वही हुआ। पुलिस ने इस देरी को दर्ज करते हुए रतनाडा पुलिस थाने में एफआईआर भी दर्ज की। ऐसे मामलों में सबसे बड़ा बिंदु समय पर आत्मसमर्पण होता है, क्योंकि पैरोल कोई खुली छुट्टी नहीं होती। जेल और पुलिस की नजर इसी बात पर रहती है कि निर्धारित समय पर वापसी हुई या नहीं। यहां भी वही मूल सवाल सामने आया। शहर के लोग भी इसे इसी नजर से देख रहे हैं—नियम सीधे होते हैं, और उनकी गिनती भी सीधी। कब आया, कितनी देर हुई, और अब आगे की प्रक्रिया क्या होगी; इसी पर सारी निगाह टिकी है। ऐसे मामलों में एक छोटी-सी देरी भी पूरा हिसाब बदल देती है।
