पार्वती नदी में नहाते वक्त चार डूब गए
गुगोर गाँव में शादी के घर से निकली छोटी सी सैर पल भर में भारी हो गई। बताया गया है कि कुछ युवा पार्वती नदी में नहाने उतरे थे, और पानी का गहरा हिस्सा समझ नहीं पाए। गाँव के लोग कहते हैं, ऐसे मौकों पर खुशी और जल्दी का मिक्स कभी-कभी बहुत महँगा पड़ जाता है. नदी का किनारा देखने में सीधा लगता है, पर अंदर का बहाव अलग ही खेल करता है। इसी वजह से आज भी कई गाँव में बड़े-बुज़ुर्ग बच्चों को बार-बार टोकते रहते हैं — थोड़ा दूर रहो, थोड़ा संभल के रहो। इस घटना के बाद वही पुरानी बात फिर याद आती है: पानी का मज़ा तभी जब उसकी गहराई का अंदाज़ा हो। चार घरों का सुकून एक पल में हिल गया, और विलेज लेवल पर सेफ्टी की बात फिर से सामने आ गई.
