पेड्डी का बॉक्स ऑफिस अब स्टेडी मोड में
वीक टू में पेड्डी का थिएटर फुटप्रिंट काफी छोटा हो गया है। पहले जो फिल्म 4,000 से ज्यादा शोज़ के साथ चल रही थी, डे 14 पर वह गिनती 1,936 तक आ गई। मतलब, ऑडियंस का फ्लो अब भी है, बस पहले जैसा वाइड स्प्रेड नहीं रहा। ऐसे फेज में फिल्म का असली टेस्ट होता है होल्ड का — यानी कम शोज़ के बाद भी लोग टिकट लेने आ रहे हैं या नहीं। ट्रेड वालों की भाषा में, ये वह स्टेज होती है जहां वर्ड ऑफ माउथ और रिपीट ऑडियंस सबसे ज्यादा काम आती है। एक लाइन में बोलें तो, स्क्रीन कम हुई, पर फिल्म ने अपनी प्रेज़ेंस बिलकुल गायब नहीं होने दी। जयपुर के सिनेमा ऑडियंस के लिए भी ये फेमिलियर सीन है: पहले फुल रश, फिर धीरे-धीरे स्टेडी लाइन। पेड्डी अब उसी स्टेडी ज़ोन में है, जहां हर शो का वैल्यू ज्यादा हो जाता है। घणी सिंपल बात है — बिग लॉन्च के बाद असली गेम सस्टेन का होता है.
