पेंग्विन के बाद नया प्रकाशक, सोनिया गांधी की किताब 10 नवम्बर को
पेंग्विन के बाद नया प्रकाशक आना अपने आप में छोटी बात नहीं लगती। 10 नवम्बर को सोनिया गांधी की किताब बाज़ार में आने वाली है, और इस फ़ैसले ने राजनीतिक दायरे में एक नया माहौल बना दिया है। जयपुर जैसे शहर में, जहाँ चाय की टपरी पर भी राष्ट्रीय बात चल पड़ती है, लोग इसे सिर्फ़ पुस्तक-प्रकाशन नहीं, बल्कि एक संदेश की तरह देख रहे हैं। मूल बात यह है कि प्रकाशक बदला, पर किताब का काम आगे बढ़ गया। अशोक गहलोत की तरफ़ से जो बात आई, उसमें यही संकेत था कि दबाव के बावजूद परियोजना रुकने वाली नहीं थी। यानी जो चीज़ पहले अटकी हुई लग रही थी, वह अब नई रफ़्तार पकड़ रही है। लोगों के बीच एक ही पंक्ति घूम रही है — सच्ची बात लिखी जा रही है, बस अब उसका घर बदल गया। और इसी में इस ख़बर का असली रंग छुपा है।
