प्रतापनगर की ज़मीन पर महिलाओं का धैर्य
प्रतापनगर योजना में प्लॉट का इंतज़ार कर रही महिलाओं का सब्र आखिर छत तक पहुँच गया। पानी की टंकी पर चढ़कर उन्होंने अपनी बात रखी, और यही बताया कि काफ़ी समय से उन्हें कब्ज़ा नहीं मिला था। इसलिए वे परेशान थीं, क्योंकि कागज़ पर प्लॉट होना और हाथ में मिलना, दोनों अलग बात होती है। यह मामला सिर्फ़ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि शहर की आवास योजनाओं में देर से मिलने वाली राहत का भी संकेत है। जयपुर जैसे शहर में ज़मीन का इंतज़ार कितना लंबा हो सकता है, यह इस दृश्य से समझ आता है। एक महिला की तरफ़ से छोटा सा साफ़ संदेश था — जब घर का नक़्शा तय हो, तो कब्ज़ा भी तय समय पर मिलना चाहिए। अब सबकी नज़र इस पर है कि सुनवाई के बाद आगे क्या कदम उठता है।
