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राजस्थान की सियासत में तीसरा रास्ता फिर गरमाया

Rajasthan ki siyasat mein teesra raasta phir garmaaya

जयपुर में हुई घोषणा ने राजस्थान की सियासत में एक पुराना हिसाब फिर खोल दिया है। राज्य में अरसे से दो बड़े दलों का वर्चस्व रहा है, लेकिन बीच-बचाव की जगह अब तीसरी आवाज़ खड़ी करने की कोशिश दिख रही है। इसका असर सबसे पहले उन मतदाताओं पर पड़ेगा जो हर चुनाव में नई जगह देखते हैं, पर अपनी बात सुनवाना भी चाहते हैं। इस नई सोच का मतलब सिर्फ सीटों का जोड़-घटाव नहीं, बल्कि अलग सामाजिक तबकों को एक साथ लाने की कोशिश भी है। स्थानीय निकाय चुनावों को शुरुआत माना जा रहा है, पर बात यहीं तक रुकने वाली नहीं लगती। जयपुर के राजनीतिक घेरे में एक ही पंक्ति बार-बार सुनने को मिल रही है — अब देखना है कि यह मोर्चा सिर्फ घोषणा रहता है या ज़मीन पर भी पैर जमाता है।