रानी पद्मिनी: चित्तौड़ की कथा और हिम्मत
चित्तौड़ के किले की हवा में रानी पद्मिनी का नाम आज भी घुलता है। पद्मावत के किस्से में उन्हें सौंदर्य और गरिमा का प्रतीक माना गया, और चित्तौड़ की राजपूत परंपरा में उनका नाम हिम्मत से जुड़ा। कथा के अनुसार, उनकी ख्याति सुनकर दिल्ली का सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी चित्तौड़ तक आ पहुँचा। यहीं से कथा का मोड़ आता है। किले की दीवार, झरोखे और रानियों की मर्यादा — सब एक ही बात कहते हैं: मर्यादा और मान का मूल्य। म्हारे राजस्थान में ऐसी कथाएँ सिर्फ इतिहास नहीं, याद भी होती हैं।
