राइजिंग राजस्थान का ग्राउंड गेम अब नंबर में
Rising Rajasthan शिखर सम्मेलन का सबसे बड़ा निष्कर्ष यही है कि घोषणा से आगे अब काम की मिट्टी तक बात पहुँच रही है। 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों को ज़मीन पर लाने की तैयारी दिखाती है कि राजस्थान को सिर्फ़ वादा नहीं, क्रियान्वयन भी चाहिए। व्यापार जगत में इसे एक संकेत की तरह देखा जा रहा है — ज़मीन, मंज़ूरी और बुनियादी ढाँचे का हाल अगर गति पकड़े, तो कागज़ वाली बात कारखाने, संयंत्र और रोज़गार तक बदल सकती है। जयपुर के कार्यालय गलियारों में एक टिप्पणी बार-बार सुनने को मिलती है: संख्या बड़ी हो तो दबाव भी उतना ही बड़ा होता है। अब देखना यह है कि इन प्रस्तावों में से कितने सच्ची तरह से चल पड़ते हैं। क्योंकि शिखर सम्मेलन की चमक अलग होती है, पर ज़मीन पर चलते इंजन की आवाज़ ही असली कहानी बताती है।
