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बाज़ार के किस्सेBazaar Ke Kisse

सांगानेर की ब्लॉक प्रिंट गलियाँ

Sanganer ki block print galiyaan

सांगानेर की गलियों में सुबह का काम शुरू होते ही लकड़ी के ब्लॉक कपड़े पर बैठाए जाते हैं। कहीं नरम नीली रंगाई, कहीं धूप में तना हुआ मलमल, और कहीं छोटी-सी कार्यशाला जहाँ घणी मेहनत से एक-एक नक्शा उभरता है। यह सिर्फ छपाई नहीं, जयपुर की पुरानी बाजार वाली आदत भी है—हाथ का काम, सीधी बात, और सामान की पहचान। एक कारीगर ने बताया कि उनके यहाँ आज 47 मीटर का आर्डर था, इसलिए सुबह से शाम तक बस एक ही धुन चली: ठीक छाप, साफ रंग। सांगानेर की यह गली आज भी दिखाती है कि परंपरा कभी संग्रहालय में बंद नहीं होती, वह रोज़ की रोज़ी में साँस लेती है।