सांगानेर की ब्लॉक छपाई, हर यार्डेज में रंग
सांगानेर की छपाई वाली गलियों में सुबह का शोर कपड़े के साथ चल पड़ता है। कारीगर चमकदार लकड़ी के ब्लॉक उठाते हैं, उन पर फूल, बेल, जाली और किनारी के नमूने होते हैं, और फिर एक-एक थाप से रंग कपड़े पर उतरता है। नील और गुलाबी कपड़ा जब सूखता है, तो सीधा-सादा सूती कपड़ा भी खास लगने लगता है। यहाँ का काम मशीन से नहीं, हाथ के ढंग से चलता है। हर घर का अपना ब्लॉक, अपना रंग, अपनी पकड़। बाजार के सादे कुर्ते, दुपट्टे और चादर में जो पहचान दिखती है, उसके पीछे इसी गली की मेहनत है। घणी सुथरी बात यह है कि जो कपड़ा आज बाजार में बिकता है, उस पर कल तक का रंग याद रह जाता है।
