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बाज़ार के किस्सेBazaar Ke Kisse

सांगानेर की टरकशी: लकड़ी में जैसे रोशनी

Sanganer ki Tarkashi: lakdi mein jaise roshni

सांगानेर की कार्यशाला में छोटी-छोटी लकड़ी की पट्टियाँ, स्याही जैसे गहरे रंग, और धूल में चमकती रेखाएँ मिलकर टरकशी बनाती हैं। पहले जयपुर के कई घरों में संदूक, मेज़ और परदे की जाली पर यही काम दिखता था; अब यह धीरे-धीरे कम हो गया है। कारीगर एक-एक टुकड़ा हाथ से बैठाकर जोड़ता है, फिर घिसाई करके उसे चमक देता है। यह सिर्फ सजावट नहीं, सब्र का काम है, भाईसाब। सांगानेर में अब बस 12 घर इस हुनर को सँभाले हुए हैं। घणी मेहनत के बाद जो निशान बनता है, वह बाज़ार की चमक से ज़्यादा घर की याद जैसा लगता है।

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