स्कूल की छत पर अब क्वालिटी-चेक का डंडा
स्कूल की दीवार और छत को लेकर अब हवा में सिर्फ धूल नहीं, सावधानी भी है। जयपुर और कोटा में छत से जुड़ी घटनाओं के बाद प्रशासन ने स्कूलों की मरम्मत और निर्माण को तेज करने का संकेत दिया है। संभाग स्तर पर समीक्षा होगी, और गुणवत्ता जांच को भी पक्का किया जाएगा। बात सीधी है: स्कूल का काम सिर्फ पेंट और प्लास्टर का नहीं होता, बच्चों की सुरक्षा का भी होता है। इसी लिए अब हर चरण पर देखभाल की बात हो रही है — कहाँ ढील रही, कहाँ काम अधूरा छोड़ा गया, और कहाँ जल्दी के चक्कर में गुणवत्ता कमजोर हुई। जयपुर वालों को यह बात घणी अच्छी तरह समझ आती है कि मजबूत छत ही सबसे पहला भरोसा होती है। अब देखना यह है कि समीक्षा के बाद काम कागज पर ही रहता है या स्कूल की इमारत में सच्ची तब्दीली दिखती है।
