एसआईआर के बाद जयपुर का पहला मतदाता परीक्षण
एसआईआर के बाद जयपुर का पहला बड़ा चुनावी परीक्षण अब वार्ड स्तर पर दिखेगा। प्रशासन ने 90 से 95 प्रतिशत मतदाता भागीदारी का लक्ष्य रखा है, और इसी वजह से हर वार्ड में संख्याओं की चिंता भी है और चर्चा भी। जयपुर जैसे शहर में, जहाँ एक वार्ड का मिजाज दूसरे से अलग हो सकता है, वहाँ भागीदारी सिर्फ एक आँकड़ा नहीं रहती — वह स्थानीय रुचि का संकेत बन जाती है। पड़ोसी कहते हैं, इस बार लोगों को मतदान केंद्र तक लाना ही असली काम है। करीबी मुकाबले वाले वार्डों में थोड़ा-सा फर्क भी परिणाम बदल सकता है, इसलिए प्रशासन की नज़र अब हर प्रतिशत अंक पर है। घणी सच्ची बात है: चुनाव का मज़ा तभी आता है जब गिनती सीधी रेखा में न चले।
