सोने की चूड़ियाँ बिकीं, 16 लाख का तोहफा और ITAT का राहत-निर्णय
पहली नज़र में मामला सीधा लगा: माँ ने अपनी सोने की ज्वेलरी बेची, उससे मिले पैसों में से 16 लाख रुपये बेटे को उपहार में दे दिए, और बैंक जमा पर आयकर विभाग ने सवाल उठा दिया। लेकिन जयपुर ITAT के सामने बात इतनी सरल नहीं थी। मामले की फाइल में उपहार-पत्र था, आभूषणों का मूल्यांकन था, और परिवार की ओर से सहायक कागज़ात भी थे। सुनवाई में पीठ ने यह देखा कि जमा का स्रोत हवा में नहीं था। सोने की बिक्री का रिकॉर्ड, उपहार का लिखित बयान और मूल्यांकन रिपोर्ट मिलकर एक कड़ी बना रहे थे। इसी आधार पर 13.04 लाख की जोड़ हटा दी गई। कर मामलों में कभी-कभी असली खेल एक ही कागज़ का होता है — जो स्रोत को जोड़ दे। और यही कागज़ इस मामले में काम आ गया।
